Friday, November 1, 2013

मैं

आज एक नयी शुरुआत हुई है मेरे लिए , इसलिए खुश हूँ मैं | शुरुआत अपने विचारों को साझा करने की.. कुछ लिखने की.. ऐसा नहीं है की इससे पहले मैंने कुछ लिखा नहीं, लेकिन उसे कभी सार्वजनिक नहीं कर पायी | कारण वही पुराना और जाना पहचाना था- संकोच | ये जो डर यानी संकोच, हमारे दिल में बैठा होता है कि अगर किसी ने हमारी आलोचना कर दी तो क्या होगा? अगर किसी को न पसंद आया तो क्या होगा ? यही हमें जीवन में आगे बढ़ने से रोकता है... आज अपने  उसी डर से पार पाने की तरफ बढाया गया ये मेरा पहला कदम है | खुद को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए, क्योंकि हर इंसान अपने आप में विशिष्ट होता है | मैं भी हूँ , शायद 'लिखने' में (ऐसा मेरा मानना है और अगर नहीं हूँ तो एक दिन हो जाऊँगी, ऐसा मेरा विश्वास है) | खैर अब मुझे अपना डर दूर करने का पहला रास्ता मिल चुका है और मैंने शुरुआत भी कर दी है | आलोचनाओं का स्वागत करने की भी तैयारी कर ली है क्योंकि यही आलोचनाएं आपको और अच्छा बनती हैं | मुझे नहीं लगता की इससे अच्छी शुरुआत और कहीं से हो सकती है.... इसलिए खुश हूँ मैं |